प्रातः पूजनीय श्री महाराणा प्रताप

शौर्य और साहस के प्रतीक महाराणा प्रताप उदयपुर (मेवाड़) में सिसौदिया राजपूत वंश के राजा थे। इतिहास में वे वीरता और अपने दृढ प्रण के लिए हैं। उन्होंने कभी मुगल सम्राट अकबर की अधीनता नहीं स्वीकारी और कई साल संघर्ष किया। महाराणा प्रताप सिंह ने कई बार मुगलों को युद्ध में परास्त किया। महाराणा प्रताप के शासनकाल का सबसे रोचक तथ्य यह है कि मुगल सम्राट अकबर बिना युद्ध के मेवाड़ को अपने अधीन लाना चाहता था! अकबर ने महाराणा प्रताप को राजी करने के लिए चार राजदूत भी नियुक्त किए थे। लेकिन, महाराणा प्रताप ने चारों को निराश किया। उन्होंने मुगलों की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया जिसके परिणामस्वरूप हल्दी घाटी का ऐतिहासिक युद्ध हुआ। 1576 के हल्दीघाटी युद्ध में उन्होंने 500 साहसी भीलों को साथ लेकर आमेर के राजा मानसिंह की 80 हज़ार की सेना का सामना किया था।

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