आदरणीय श्री सुभाषचंद्र बोस

देशवासी उन्हें ‘नेताजी’ के नाम से भी जानते हैं। वे भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष के लिए उन्होंने जापान के सहयोग से ‘आज़ाद हिंद फौज’ का गठन किया था। उनका ‘जय हिन्द’ का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया। ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा!’ का नारा भी उनका था, जो अत्यधिक प्रचलन में आया। नेताजी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने ‘सुप्रीम कमाण्डर’ के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया था और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में जमकर मोर्चा लिया।

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